एमसीयू में रेखी सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पिनेस का ओरिएंटेशन और एम्पॉवरमेंट सत्र आयोजित
दूसरों को खुशी देना ही सच्चा आनंद हैः डॉ. हरिकृष्णा
आंतरिक शांति से ही सृजनात्मकता आती हैः डॉ. ऋतु पांडे शर्मा
जीवन सिर्फ मुनाफे और लाभ के बारे में सोचना भर नहीं- कुलगुरु
भोपाल 09 फरवरी 2026 : आज दुनियाभर में अवसाद और तनाव प्रमुख सामाजिक समस्या बन चुके हैं। हमारे यहां हर 8 मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। युवाओं में अवसाद बढ़ना बहुत ही खतरनाक है। पुराने वक्त में हमारे यहां संयुक्त परिवार होते थे और गुरुकुल जैसी शिक्षा व्यवस्था थी। तब युवाओं का जीवन तनावमुक्त था। इसलिए काउंसिलिंग की आवश्यकता नहीं होती थी। आज के बदले हुए परिवेश में तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में काउंसिलिंग बहुत आवश्यक है। एमसीयू में में रेखी सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पिनेस का ओरिएंटेशन और एम्पॉवरमेंट कार्यक्रम में रेखी सेंटर की समन्वयक डॉ. ऋतु पांडे शर्मा ने शर्मा कही।
उन्होंने विश्वविद्यालय में इस विषय पर आयोजित पहले कार्यक्रम में कहा कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के लिए तनावमुक्त वातावरण में सीखने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि अवसाद दिखाई नहीं देता लेकिन यह समस्या बहुत बड़ी है। आनदंपूर्ण जीवन की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि आतंरिक शांति से ही सृजनात्मकता आती है।
डॉ. शर्मा ने एमसीयू में रेखी केंद्र के माध्यम से आगामी समय में कार्ययोजना के बारे में बताते हुए कहा कि मीडिया, संचार और आनंद विज्ञान के जोड़ से सामाजिक बदलाव लाने का प्रयास होगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने कैलिफोर्निया में निवासरत और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र रहे डॉ सतेंद्र सिंह रेखी के सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में योगदान के बारे में बताते हुए कहा कि हम सभी को समाज को कुछ देने के लिए कार्य करना चाहिए। साइंस ऑफ हैप्पीनेस पर रेखी जी के कार्यों के साथ एमसीयू के जुड़ने पर उन्होंने शुभकामनाएं दीं।
इस आयोजन में रेखी सेंटर के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ. श्री हरिकृष्णा ने कहा कि जो कुछ भी संवेदी अनुभूति हमें होती है वह सुख हो सकता है। यह आनंद का शुरूआती स्तर हो सकता है लेकिन मानसिक प्रसन्नता ही वास्तव में आनंद होती है। उन्होंने कहा कि सबसे आनंद में रहने वाला वह व्यक्ति होता है जो किसी भी तरह के बाहरी मत को ज्यादा महत्व नहीं देता है।
डॉ. श्रीकृष्णा ने मानव को प्रकृति में विशिष्ट बताते हुए कहा कि मनुष्य होना एक आर्शीवाद की तरह है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति सामूहिकता में विश्वास करती है जिसमें दूसरों के साथ आनंद को साझा किया जाता है। पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ऐसा है जिसका दूसरे लोगों पर सबसे अधिक असर पड़ता है ऐसे में अगर पत्रकारिता दूसरे लोगों के लिए आनंद का विषय बन सकती है तो यह पूरे समाज के लिए आनंददायी हो सकती है। इस सत्र में डॉ. कृष्णा ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया।
इस कार्यक्रम का संयोजन संचार शोध विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सी.पी. अग्रवाल ने किया। डॉ. अग्रवाल ने एमसीयू में स्थापित रेखी केंद्र की कार्ययोजना के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. डॉ. शशिकला ने माना। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी और कर्मचारी उपस्थित थे।




