प्रो. के.जी. सुरेश
कुलपति
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल

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वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार, मीडिया गुरु, अकादमिक प्रशासक और संचार विशेषज्ञ, भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर के.जी. सुरेश वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति हैं। हाल में ही प्रोफेसर सुरेश शैक्षिक संचार संकाय (सीईसी), यूजीसी, के शासी मंडल में सदस्य नियुक्त किए गए हैं।

इससे पूर्व प्रोफेसर सुरेश स्कूल ऑफ़ मॉडर्न मीडिया, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (UPES) देहरादून में संस्थापक डीन के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और दूरदर्शन न्यूज में वरिष्ठ सम्पादकीय सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

शियानेट न्यूज़ नेटवर्क में संपादकीय सलाहकार, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में मुख्य राजनीतिक संवाददाता भी रह चुके हैं।

प्रो. सुरेश जागरण लेकसिटी भोपाल युनिवर्सिटी एवं एपीजे जनसंचार संस्थान नई दिल्ली में एमेरिट्स प्रोफेसर के रुप में कार्य कर चुके हैं । एपीजे सत्या विश्वविद्यालय गुड़गांव में भी आप मानद प्रोफेसर के रुप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

मीडिया साक्षरता में आपके योगदान को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने आपको कोविड सलाहकार समिति में नोबेल पुरस्कार से सम्मा नित श्री कैलाश सत्यार्थी और देश के प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ सदस्य नियुक्त किया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस समिति के अध्यक्ष हैं।

प्रो. सुरेश को हाल ही में केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। आपको राष्ट्रमंडल युवा कार्यक्रम, एशिया द्वारा शांति के लिए राष्ट्रमंडल युवा राजदूत नामित किया गया था। जनसंपर्क पेशे में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिसंबर 2017 मेंआंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 39वें अखिल भारतीय जनसंपर्क सम्मेलन में आपको को पीआरएसआई लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया।  जनसंपर्क के क्षेत्र का सर्वोच्च पुरस्कार है। उन्हें नवंबर 2018 में बिजनेस वर्ल्ड मैगज़ीन और एक्सचेंज4मीडिया द्वारा स्थापित मीडिया शिक्षा पुरस्कार में “दूरदर्शी नेता” से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा एकता, भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए पहला ख्वाजा गरीब नवाज पुरस्कार और मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार एन.आई.एस.सी.ओ.आर.टी मीडिया स्कूल और यूरेका प्रकाशन द्वारा दिया गया।

प्रो. सुरेश इंडियन पेनोरामा 2017-2018, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में प्रतिष्ठित फीचर फिल्म ज्यूरी एंड नॉन फिक्शन ज्यूरी में सम्माननीय सदस्य रह चुके हैं। प्रो. सुरेश राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के उत्तर भारत जूरी 2017 के अध्यक्ष रहे हैं। आप एक मात्र ऐसे पत्रकार हैं, जिन्होंने वाशिंगटन टाइम्स द्वारा मार्च 2015 में सिओल में आयोजित विश्व मीडिया सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। संयुक्त राष्ट के अलायंस ऑफ सिविलाइजेशन और द इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन द्वारा आयोजित प्लूरल प्लस अंतरराष्ट्रीय युवा वीडिया उत्सव 2012 आप अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक रहे हैं। इस फिल्मोत्सव के नामंकित होने वाले पहले आप पहले भारतीय हैं। इसके साथ ही वुडपेकर चौथा अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव 2016 में अध्यक्ष के पद को सुशोभित कर चुके हैं।

प्रो. सुरेश चुनाव आयोग द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय मीडिया सम्मान 2016, सीएमएस यूनीसेफ मीडिया फेलोशिप 2016, भारतीय प्रेस परिषद द्वारा दिए जाने वाले पत्रकारिता के राष्ट्रीय पुरस्कार यूनीसेफ रेडिया फॉर चाइल्ड पुरस्कार 2016, पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय पुरस्कार 2016, जेंडर सेन्सिटीविटी  के लिए पापुलेशन फस्र्ट द्वारा दिए जाने वाले “लाडली मीडिया एवं विज्ञापन पुरस्कार” 2014-15 एवं स्कोप कारपोरेट कम्युनिकेशन एक्सीलेंस पुरस्कार 2017 & 2019 के लिए गठित निर्णायक मंडल के सदस्य रहे हैं। 

एक जानेमाने टेडेक्स वक्ता, प्रो सुरेश ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को संबोधित किया है। इनमें राजस्थान पत्रिका द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित झाबरमल वार्षिक व्याख्यान जनवरी 2018, असम सरकार द्वारा सिलचर में आयोजित राज्य स्तरीय राष्ट्रीय प्रेस दिवस व्याख्यान, नवंबर 2019, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, जम्मू द्वारा आयोजित सत पॉल साहनी स्मृति व्याख्यान शामिल हैं। वहीं जनवरी 2019 में अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई में अन्ना व्याख्यान, भारतीय युवा संसद, जयपुर 2017 और जयपुर युवा महोत्सव 2018, सियोल, दक्षिण कोरिया, जून 2018 में अंतर्राष्ट्रीय सह-उत्पादन सम्मेलन, कोरिया संचार आयोग द्वारा आयोजित, जनवरी 2019 में एमआईटी वर्ल्ड पीस विश्वविद्यालय, पुणे में तीसरा राष्ट्रीय शिक्षक कांग्रेस,  नई दिल्ली में लॉएशिया अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मानवाधिकारों पर मुख्य भाषण, ब्रिटेन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ आइडियाज और ब्रिटिश काउंसिल इंडिया द्वारा आयोजित विचारों की लड़ाई पैनल चर्चा, जून 2020 में एबीपी एजुकेशन द्वारा आयोजित मीडिया एजुकेटर्स राउंडटेबल, टोक्यो में आयोजित भारत जापान पार्टनरशिप समिट सितंबर 2011, दिसंबर 2011 में दोहा, कतर में संयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं के गठबंधन (यूएनएओसी) का चौथा मंच, वियना, ऑस्ट्रिया में यूएनएओसी का पांचवां मंच, एशियाई युवा नेताओं का शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली, अक्टूबर 2013 में सौलहवे विश्व संस्कृत सम्मेलन, बैंकॉक, जून 2015 और विश्व हिंदी सम्मेलन, मॉरीशस 2018 के अलावा आईसीएसएसआर और यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉज़ेन, बेसल, स्विट्ज़रलैंड के सयुक्त तत्वावधान में सार्वजनिक नीति और भलाई पर सत्र की अध्यक्षता करते हुए सितंबर 2017 व्याख्यान दिए हैं।

प्रोफेसर सुरेश ने अनेक देशों की यात्राएं की हैं। इनमें प्रमुख रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, नेपाल, श्रीलंका, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, हंगरी, कतर, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका आदि शामिल हैं।

प्रो. सुरेश अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के सदस्य हैं। इनमें मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की अकादमिक परिषद, सोसाइटी ऑफ सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता;  भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की अनुसंधान समिति,  शैक्षिक संचार के लिए कंसोर्टियम के गवर्निंग बोर्ड, यूजीसी;  शासी निकाय, विज्ञान प्रसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, सलाहकार परिषद, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, दिल्ली विश्वविद्यालय, अकादमिक परिषद केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश और स्कूल बोर्ड ऑफ अबनिंद्रनाथ टैगोर स्कूल ऑफ क्रिएटिव आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन स्टडीज, असम विश्वविद्यालय, सिलचर आदि शामिल हैं। वे विज्ञान और प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार के कार्यक्रम सलाहकार के सह अध्यक्ष हैं।

वे भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए एक रिसोर्स पर्सन (स्रोत/संसाधक व्यक्ति) हैं।  इसके अलावा वे शैक्षिक संचार के लिए संघ, यूजीसी; उच्च शिक्षा में व्यावसायिक विकास केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय प्रसारण और मल्टीमीडिया अकादमी (प्रसार भारती), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, भारतीय विमानन अकादमी और विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस), विदेश मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला और संस्कृति केंद्र से संबंद्ध रहे हैं।