आनंद परिस्थितियाँ नहीं, मन की अवस्था से तय होता है
एमसीयू में सिखाए एक आनंदित शिक्षक बनने के गुर
भोपाल 22 जुलाई 2026 : एक शिक्षक कैसे हँसमुख, शांतचित्त और ऊर्जावान हो सकता है, इस विषय पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में तीन दिनी कार्यशाला बुधवार को प्रारंभ हुई। प्रथम दिन तीन सत्रों में व्यक्तित्व में सकारात्मकता लाने के उपायों पर विशद चर्चा हुई। मुख्य अतिथि हैदराबाद के रेखी फ़ाउंडेशन के प्रोफ़ेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ श्रीहरि कृष्ण ने ख़ुशी या आनंद को अभ्यास से पैदा किया जा सकता है। आख़िर एक सा बाहरी वातावरण होने के बावजूद एक व्यक्ति सुखी और एक दुखी क्यों होता है। ख़ुशी को परिस्थितियाँ नहीं, मन की अवस्था तय करती है।
संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के रेखी सेंटर आफ़ एक्सीलेंस फ़ॉर साइंस आफ़ हैप्पीनैस ने किया है। इसमें विवि के शिक्षकों के साथ ही अतिथि शिक्षक भी भाग ले रहे हैं। श्री हरि के अलावा फाउंडेशन की सीनियर फ़ैकल्टी डॉ रितु शर्मा तीन दिन एक आनंदित शिक्षक के गुर बताएंगे। पहले दिन दोनों ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से आनंद को तय करने, उसका अनुभव करने और उससे होने वाले लाभों को रखा। संवाद के ज़रिये शिक्षकों अनुभव साझा किए जिसमें उन्होंने उन वाकयों को बता जब उन्हें विद्यार्थियों के बीच बहुत सुखद अनुभूति हुई या विद्यार्थी ने उनमें रुचि ली। वक्ताओं ने ध्यान देने (अटेंशन) और केन्द्रित करने (फ़ोकस) के गुर बताए।उन्होंने कहा कि फ़ोकस एक करेंसी है। सोशल मीडिया के ज़रिए पैदा की जा रही व्याकुलता (डिस्ट्रेक्शन) के बारे में उन्होंने कहा कि हमें तय करना होगा कि अटेंशन कहाँ और कब करना होगा। हम सूचनाओं का उपभोग तो खूब कर रहे हैं किन्तु खुद की सृजनात्मकता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अपनी ऊर्जा को अटैंशन के साथ एक दिशा में प्रवाहित करने से ही सफलता मिलती है। वक्ताओं ने कहा कि एक बच्चे की तरह वर्तमान में जीने ख़ुशी का एक कारक है। इसे हम भी सायास पा सकते हैं।
हम सोंचे कि सकारात्मक कर सकते हैं: कुलगुरु
कार्यक्रम का शुभारंभ लता मंगेशकर सभागृह में कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने रोज़गार की आपाधापी में हैं लेकिन इसमें एक खिड़की ऐसी खुली रखनी चाहिए जो आनंद का भाव दे सके। उन्होंने ओशो कम्युन की कार्यप्रणाली का अनुभव बताते हुए कहा कि वहाँ व्यक्ति अपने मन के मुताबिक़ कामों को अपने अनुसार नियोजित कर ज़्यादा सक्रिय व ऊर्जावान बना रहता था और रचनात्मकता का प्रदर्शन करता था। हमें यह सोचना चाहिए कि क्या सकारात्मक कर सकते हैं। श्री तिवारी ने शिक्षकों से कहा कि वे नियमित पाठ्यक्रमों से अलग व्यावहारिक जीवन में विद्यार्थियों को कुछ अलग करने को प्रोत्साहित करें तो उत्कृष्ट प्रतिभाएँ निकलेंगीं। आभार प्रदर्शन प्रभारी कुलसचिव पी शशिकला ने किया। संचालन वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ मनीषा वर्मा ने किया।





