एमसीयू में “डिजिटल सिनेमैटोग्राफी और फोटोग्राफी” विषय पर कार्यशाला का आयोजन
सिंहस्थ, वाइल्ड लाइफ, नेचर और आर्किटेक्चर के फोटोग्राफ्स की प्रदर्शनी भी आयोजित
भोपाल 24 अगस्त 2026 :फोटोग्राफी के 200 वर्ष पूरे होने पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा अध्ययन विभाग ने सोमवार को को “डिजिटल सिनेमैटोग्राफी और फोटोग्राफी” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के लता मंगेशकर सभागार (तक्षशिला ब्लॉक) में हुआ। इस कार्यशाला पैनासोनिक लाइफ साल्यूशंस के वरिष्ठ अधिकारी श्री सौरभ साहू और राजेश प्रजापति ने विद्यार्थियों को डिजिटल फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी के महत्वपूर्ण टिप्स दिए। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने की। चलचित्र विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का संयोजन डॉ. गजेंद्र सिंह अवास्या ने किया। यह आयोजन पैनासोनिक लाइफ साल्यूशंस के सहयोग से हुआ। कार्यशाला में आधुनिक कैमरा लेंस का लाइव डेमो भी दिया गया, जिसे छात्रों ने विशेष रुचि के साथ देखा।
कार्यशाला के साथ फोटोग्राफी के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में फोटोप्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध युवा फोटोग्राफर आदित्य चौरसिया की सिंहस्थ, वाइल्ड लाइफ, नेचर, आर्किटेक्चर के फोटोग्राफ्स की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने किया।
फोटोग्राफी कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ द्वारा छात्रों को कैमरे और लेंस की बारीकियों से रूबरू कराते हुए बताया कि फोटोग्राफी और सिनेमा दोनों ही दृश्य की भाषा हैं। कैमरा इस भाषा का सबसे बड़ा माध्यम है। श्री सौरभ साहू ने समझाया कि फोटोग्राफी में अलग-अलग एंगल्स किसी महत्वपूर्ण होते हैं। सिनेमैटोग्राफी में भी कैमरा एंगल्स किसी किरदार को अधिक प्रभावशाली बना सकते हैं।
उन्होंने लो-एंगल शॉट और हाई-एंगल शॉट के उदाहरण देकर बताया कि कैमरा किस तरह दृश्यों को और प्रभावी बनाता है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया गया कि कलर टोन क्या होता है और इसका चयन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। पैनासोनिक लाइफ साल्यूशंस के श्री राजेश प्रजापति ने विद्यार्थियों को तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए कहा कि डिजिटल युग में बेहतर क्वालिटी लेंस और उपकरणों से फोटोग्राफी की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। इसके चलते सिनेमा निर्माण में भी बहुत बदलाव आए हैं। कार्यशाला में विद्यार्थियों को विशेषज्ञों द्वारा वार्म टोन और कोल्ड टोन के अलग-अलग प्रभावों पर उदाहरणों सहित समझाया। इसके बाद टीम बनाकर विद्यार्थियों को फोटोग्राफी के अभ्यास भी करवाए गए।






