हमें अपनी भाषा, जड़ और पृष्ठभूमि पर गर्व होना चाहिए: दुर्गेश सिंह
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘अभ्युदय-2026′ का दूसरा दिन
भोपाल 19 अगस्त 2026 :माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन कार्यक्रम ‘अभ्युदय-2026’ में दूसरे दिन देशभर से आये पूर्व विद्यार्थियों ने नवागत विद्यार्थियों को संबोधित किया। सिनेमा के क्षेत्र में कार्यरत और वेबसीरीज ‘गुल्लक’ के लेखक दुर्गेश सिंह ने कहा कि हमें अपनी भाषा, अपनी जड़, अपनी जमीन और पृष्ठभूमि पर गर्व करना चाहिए। आज मुझे जो भी काम मिल रहा है, उसके पीछे मेरी भाषा, जमीन और पृष्ठभूमि है। उन्होंने कहा कि एआई आपको रिप्लेस करने नहीं आ रहा है। ये टूल्स हैं, इनका उपयोग करते आना चाहिए। दुनिया में इनका उपयोग किया जा रहा है। लेखन में भी एआई का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी धार्मिक कहानियों पर खूब सिनेमा बन रहा है। हमारे दादी-नानी ने जो कहानियां सुनायीं हैं, वे हमारे लिए बहुत महत्व की हैं।
टीवी पत्रकारिता में सक्रिय एवं एंकर रवि मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता में संसाधनों का स्थान तो है लेकिन मूल्यों का महत्व अधिक है। जब हम यहां से पढ़कर निकलें तो कुछ मूल्य लेकर निकलें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान नौकरी की चिंता मत कीजिए। इस दौरान केवल पढ़िए, सीखिए, कैंपस लाइफ जिएं, गलतियां कीजिये और उनसे सीखिए। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि पत्रकारिता में आपका सबसे बड़ा साथी है, आपका स्वास्थ्य। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। तकनीक प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी अजीत कुमार ने कहा कि यहाँ से सीखकर आगे बढ़़े और सतत नया सीखते रहें।
डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय प्रसून मिश्रा ने विद्यार्थियों से कहा कि आप पढ़ाई के दौरान तीन काम अवश्य कर लें- 1. फील्ड की जो जरूरत है, उसकी समझ विकसित करना। इसके साथ ही यह भी तय कर लें कि दो साल के बाद में करना क्या चाहते हैं। 2. जिस विषय को आप पढ़ रहे हैं, उसकी गहरी समझ विकसित करें। 3. स्किल्स सीखें। जैसे- लिखना, बोलना, कैमेरा संचालन, वीडियो संपादन, लेआउट डिजाइन सीखें। स्किल्स को अच्छा करने के लिए रियाज करें। इसके साथ ही जब आप जॉब में जाएं तब अपने एटिट्यूड और टेम्परामेंट पर काम करें क्योंकि वहां से आगे बढ़ने के लिए इनकी जरूरत पड़ेगी।

बिजनेस पत्रकारिता में सक्रिय मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि 22 साल बाद विश्वविद्यालय में लौटकर नए विद्यार्थियों से संवाद कर रही हूं तो अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं। हमारे शिक्षकों ने केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने पर ही जोर नहीं दिया अपितु उन्होंने जीवन भी सिखाया और करियर गढ़ने में भी दिशा दी। राजनीतिक संचार के क्षेत्र में सक्रिय पंकज झा ने कहा कि कुछ लिखना है, पढ़ना है और आगे बढ़ना है तो यह विश्वविद्यालय आपके लिए सबसे उपयुक्त जगह है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हमें तीन काम अवश्य करना चाहिए- पढ़ना, पढ़ना और पढ़ना। हमारे क्षेत्र में पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है।
पहले बैच (1991) के विद्यार्थी संजय सलिल ने ऑनलाइन जुड़कर विश्वविद्यालय की यात्रा पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अत्यंत सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह विश्वविद्यालय आज अपने विशाल परिसर में पहुंच गया है। नवागत विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि कभी रुकियेगा नहीं, चलते रहेंगे तो लक्ष्य तक अवश्य पहुंच जाएंगे। पूर्व विद्यार्थी नीति सुधा ने प्राग से ऑनलाइन जुड़कर नए विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने मनोरंजन पत्रकारिता के सूत्र विद्यार्थियों के साथ साझा किए। फिल्म मेकिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नील रुद्रजीत मुखर्जी ने AI को ठीक तरीके से उपयोग करने की सलाह दी और बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सारे प्रोग्राम AI से ही लिखे जा रहे हैं।
सुधांशु शेखर ने बताया कि एडवरटाइजमेंट, क्रिएटिव हेड्स और फिल्म मेकिंग के साथ आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने अपने बनाए फीडो प्लेटफार्म के बारे में बताया। पत्रकारिता के विश्वविद्यालय से टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने वाली मिताली उपाध्याय ने कम्युनिकेशन की ताकत को आज के समय में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण स्किल बताया। ललित कुमार ने कहा कि AI को वैसाखी न बनाए और अन्य प्रचलित विदेशी भाषाओं को सीखने का प्रयास करें। पूर्व विद्यार्थी ओमप्रकाश रजक ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कॉलेज के दिनों में की गई तैयारी ही आने वाले दिनों में सबसे बड़ी पूंजी होगी।
विज्ञापन के क्षेत्र में सक्रिय सुशील अग्रवाल ने कहा कि मैंने विश्वविद्यालय से ‘समाचार पत्र प्रबंधन’ का डिप्लोमा कोर्स किया था। इस कोर्स ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। मीडिया की समझ लेकर मैंने विज्ञापन के क्षेत्र में काम करना प्रारंभ किया। पहले एक समाचार पत्र के विज्ञापन विभाग में काम शुरू किया, उसके बाद अपनी स्वयं की विज्ञापन एजेंसी शुरू की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप में संघर्ष करने की क्षमता है और एक लक्ष्य लेकर चलते रहेंगे तो एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत में रोजगार के बहुत अवसर हैं।

लोकलाइजेशन इंडस्ट्री में कार्यरत शिखा शर्मा ने कहा कि मैंने विश्वविद्यालय में जो कुछ सीखा उसके कारण मीडिया में आत्मविश्वास से काम कर सकी। उन्होंने विद्यार्थियों को लोकलाइजेशन इंडस्ट्री की जानकारी दी। बिजनेस पत्रकारिता में सक्रिय अपर्णा झा ने कहा कि पढ़ाई के दौरान अपने रुचि के क्षेत्र चिन्हित कीजिए। रुचि का काम करने का अवसर बने तो आनंद आता है। डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडेय ने कहा कि व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर ऑथेंटिसिटी और इंटेग्रिटी बनाकर रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि आप अपना ब्रांड बनाना चाहते हैं तो इन दोनों बातों को अपनाना होगा। हम जैसा बोलते हैं, वैसा ही हमें करना और दिखना चाहिए। श्रवण करें, मनन करें और निदिध्यासन करें।

पहले बैच के विद्यार्थी और वरिष्ठ पत्रकार दीपक पगारे ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्वीकार्यता और लोकप्रियता निरंतर बढ़ती गई है। विश्वविद्यालय में हमें जो व्यवहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान मिला, उसने हमारा जीवन बनाया है। डिजिटल मीडिया में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार सुमित पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में सीखने की प्रक्रिया ही आपको अच्छा पत्रकार बनाएगी। विश्वविद्यालय में विभिन्न अवसरों पर कुमार विश्वास, पीयूष मिश्रा जैसे दिग्गज आते हैं, हमें उनकी यात्रा से सीखना चाहिए। उन्होंने सिंहस्थ कवरेज के अपने अनुभव सुनकर बताया कि इस तरह के बड़े आयोजनों को किस तरह कवर किया जाता है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा पत्रकार वह होता है, जो पाठकों को केंद्र में रखकर समाचार बनाता है।

1998-2000 बैच की विद्यार्थी तारिका ने अमेरिका से, 2002-2004 बैच के विद्यार्थी विनोद नागर ने दुबई से और 2011-2013 के बैच के छात्र सुमित रंजन ने प्राग से, 2013-2017 बैच के विद्यार्थी इजिप्ट से आशीष सिंह ने और मंतोष सिंह ने दुबई से ऑनलाइन जुड़कर संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में 2026 में प्रथम आने वाले विद्यार्थियों को प्रावीण्यता प्रमाण पत्र प्रदान किये गये।
