एमसीयू में राष्ट्रीय गीत के 150 पूर्ण होने पर “वंदे मातरम 150″ कार्यक्रम का आयोजन
स्वाधीनता आंदोलन में क्रांतिकारियों का युद्धघोष था वंदे मातरम
अंग्रेजों के खिलाफ देशवासियों के लिए एक शस्त्र बना वंदे मातरम
भोपाल 14 फरवरी 2026 : एक राष्ट्र मंत्र के रूप में क्रूर अंग्रेज शासन के विरोध में वंदे मातरम ने हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रीयता की लौ जलाने के काम किया। जब अंग्रेज भारत में आए तब से उन्होंने तरह-तरह की नीतियों से हमारे देश और समाज को नुक्सान पहुंचाने का कार्य किया। ब्रिटिश हुकूमत ने असंख्य निर्दोष भारतीयों की हत्याओं] किसानों पर क्रूर अत्याचारों से लेकर स्वराज के लिए आंदोलनरत देशवासियों पर अनगिनत अत्याचार किए। उस दौर में सत्याग्रहियों और क्रांतिकारियों में लिए वंदे मातरम एक ऊर्जा का स्रोत बना। एमसीयू के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में पुणे से आई प्रसाद कुलकर्णी] प्रदीप जी] अभिषेक जी] चारूलता जी] और मल्हार प्रोडक्शन की टीम ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रीय गीत की अब तक की संपूर्ण कथा की अद्भुत प्रस्तुति दी।
राष्ट्रीय गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नवरात्रि के उत्सव के दौरान दुर्गा मां की मूर्ति में भारत माता के दर्शन का अनुभव हुआ। वहीं से वंदे मातरम की प्रेरणा मिली।चित्रों] ध्वनियों और लाइटिंग के संयोजन के साथ इस कलात्मक प्रस्तुति में हाल में मौजूद दर्शकों ने जाना कि किस तरह वंदे मातरम गीत अंग्रेजों के खिलाफ फूटी एक चिंगारी से ज्वाला में परिवर्तित हुआ। कैसे महान क्रांतिकारी सूर्यसेन ने अपने बलिदान से पहले अंतिम घोष के रूप में वंदे मातरम का उच्चारण कर देशवासियों के लिए प्रेरणा दी। कैसे वीर सावरकर] मदन लाल ढींगरा से लेकर गुरूदेव रवींद्र नाथ ठाकुर और गांधी जी के लिए भी वंदे मातरम स्वराज की प्रेरणा का प्रतीक बना। कैसे उस दौर में वंदे मातरम गाने वाले युवाओं को क्रूरता से अंग्रेज सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जाता था। इस सब के बावजूद राष्ट्रीय गीत का प्रभाव इतना अधिक था कि जेल में बंद क्रांतिकारियों के लिए जंजीरें भी वंदे मातरम बोलती थीं।
इस प्रस्तुति में बताया आनंद मठ में वंदे मातरम का स्थान हीरे के समान है। यह गीत आजाद हिंद सेना का मार्चिंग सांग भी था। क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम को अपना शस्त्र बना लिया था। वंदे मातरम हमारे दिलों और दिमाग में है। इस प्रस्तुति में बताया गया कि वंदे मातरम पर कैसे फिल्मों तथा स्वतंत्र एल्बमों में गीत बनें हैं। कैसे इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान और आदर मिला यह भी प्रस्तुति में बताया गया। कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला शो है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम स्वाधीनता आंदोलन का प्रमुख मंत्र है। इस अवसर पर आकाशवाणी के प्रख्यात उद्घोषक श्री कमल शर्मा ने कहा कि इस प्रस्तुति में राष्ट्रीय गीत के संघर्ष की कथा के बारे में बहुत ही शानदार तरह से बताया गया है।
यह आयोजन दत्तो पंत ठेंगड़ी शोध संस्थान तथा एमसीयू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का समन्वय प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेई ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों तथा दर्शकों का आभार विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रोफेसर पी. शशिकला ने माना। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी] शिक्षक तथा अधिकारी उपस्थित थे।





