कोर्स काफी नहीं, मीडिया विश्वविद्यालय निरंतर रचनात्मकता से ही जीवंत बनेगा
एमसीयू में शिमला और दिल्ली के मेहमान
भोपाल 27 दिसंबर 2025 । माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में सेमिस्टर की परीक्षाएँ आरंभ हो गई हैं। शिमला और दिल्ली में पदस्थ प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और लोकसभा के अधिकारियों ने परीक्षा के पहले दिन परिसर का अवलोकन किया। परिसर में जारी नवाचारों को देखकर अभिभूत अतिथियों ने कहा कि मीडिया का विश्वविद्यालय ऐसे ही प्रयोगों से जीवंत होगा। यह केवल किताबी पढ़ाई के लिए नहीं है बल्कि यहाँ लेखन और सृजन की रचनात्मकता निरंतर होनी चाहिए।
अधिकारियों के दल में दिल्ली में लोकसभा के डिप्टी डायरेक्टर विकास नेमा, पीआईबी में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (सीबीसी) के असिस्टेंट डायरेक्टर समीर वर्मा और पराग मांडले, शिमला में सीबीसी के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रकाश पंत और भोपाल के एडी अजय उपाध्याय शामिल थे। उन्होंने दादा माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा के दर्शन किए और माखनपुरम के इस चौक के सौंदर्यकरण का अवलोकन किया। बीती बारिश में लगे एक हजार एक सौ ग्यारह पौधे रोपने का प्रयोग उन्हें बेहद पसंद आया। विश्वविद्यालय में इसी महीने संपन्न “कार्टून शो’ में आए देश भर के नामचीन कार्टूनिस्टों के 40 साल की कार्टून साधना के कृतित्व को समर्पित कार्टून प्रदर्शनी को चाणक्य भवन में देखा और गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में सुसज्जित “हिस्ट्री इन हेडलाइंस’ के हर फ्रेम को गौर से देखा। “सदी साक्षी है’ नाम से इस विशेष अखबारी प्रदर्शनी में भारत में बीते सौ वर्षों में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं के सौ फ्रंट पेज कवरेज शामिल हैं।
कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने उन्हें बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन गुजराती, मराठी, बांग्ला सहित दक्षिण भारतीय भाषाओं के अखबारों के महत्वपूर्ण फ्रंट पेज कवरेज भी लाने का प्रयास कर रहा है ताकि सभी भाषाओं की पत्रकारिता की झलक एक ही स्थान पर नजर आए। तक्षशिला और विक्रमशिला परिसर के बीच विशाल दीवार पर बन रही 35 फुट ऊंची स्वामी विवेकानंद और उदयपुर के नीलकंठेश्वर मंदिर की पेंटिंग देखकर अभिभूत अतिथियों ने कहा कि मीडिया का विश्वविद्यालय ऐसे ही प्रयोगों से जीवंत होगा। यह केवल किताबी पढ़ाई के लिए नहीं है बल्कि यहाँ रचनात्मकता निरंतर होनी चाहिए। गौरतलब है कि प्रकाश पंत और अजय उपाध्याय एमसीयू के पहले बैच के विद्यार्थी हैं, जिनका चयन पीआईबी में हुआ। अतिथियों को बांग्लादेश की व्यथा पर प्रकाशित विशेषांक “पहल’ की प्रतियाँ भेंट की गईं।




