“एमसीयू में तीन दिवसीय टेड टॉक संवाद का समापन”

भारत के इतिहास और विरासत को जानें युवा: कुलगुरू

भोपाल 08 अक्टूबर 2026 : गलत चीज का लालच बुरा होता है लेकिन अगर हम अच्छी जिंदगी, बेहतर सेहत, अच्छे जाॅब और समाज में अच्छी प्रतिष्ठा का लालच करें तो यह बुरा नहीं है। अक्सर किसी बाहरी प्रभाव से भी हमारे भीतर बदलाव आ सकता है। बेहतर चीजों को देखते हुए, उन्हें समझते हुए हम बदलाव महसूस कर सकते हैं। किसी भी तरह से ऊंचाई तक जाने के लिए हमको हल्का होना होगा। अपनी किसी पुरानी गलत को छोड़ सकते हैं, किसी गलत विचार या गलत ढंग को छोड़ सकते हैं तभी हम आगे बढ़ सकते हैं। ये बातें एमसीयू में टेड टॉक के समापन के अवसर पर आज के सत्र प्रथम वक्ता मोटिवेशनल गुरू राजीव अग्रवाल ने कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हमारे जीवन के मैनुएल्स नहीं होते हैं। अक्सर लाइफ के मैनुएल्स हम खुद ही तय करते है। इसलिए जीवन के बारे में भी हमें नए तरीके से सोचना होगा। हमारे साथ कौन कैसा व्यवहार करेगा यह हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन हम अगर सही से बर्ताव करें तो लोग भी हमारे साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।   इसलिए कुछ अच्छे परिणामों के लिए हम स्वयं पर कुछ काम कर सकते हैं। अपनी कुछ बातों को नियंत्रित कर हम अपने जीवन में बहुत कुछ बदल सकते हैं। खुद से जुड़ी पांच बातें नियंत्रित कर हम इन बदलावों को देख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि छोटी-छोटी सी बातें नियंत्रित कर अपने जीवन में बहुत कुछ बदल सकते हैं।
माउथ कंट्रोल
हमारी खराब बातें किसी को भी बुरी लग सकती हैं। खराब शब्द लोगों को अच्छे नहीं लगते हंै। इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखकर हम  बहुत कुछ बदल सकते हैं। अच्छा बोल कर चीजें बेहतर कर सकते हैं।
मूड कंट्रोल
अक्सर खराब मूड हमारे काम बिगाड़ देता है। तो मूड को नियंत्रित कर हमारा मन भी शांत रहेगा और जो भी काम हम करेंगे उसके परिणाम भी अच्छे आएंगे।
माइंड कंट्रोल
उन्होंने कहा कि अपने मस्तिष्क को नियंत्रित करने से हम बहुत अच्छी तरह काम कर सकते हैं। अपने मन को फोकस कर हर काम में 100 प्रतिशत इनपुट दें। मन को धैर्य भी सिखाएं।
मनी कंट्रोल
पैसे को नियंत्रित करें। इसे सही ढंग से कमाएं। याद रखें कि अच्छा करने के लिए नीयत अच्छी चाहिए। अच्छे काम पर अपना पैसा खर्च करें।
मैनर्स कंट्रोल
हमारे तौर-तरीके किसी को भी हमारी परवरिश के बारे में बता देते हैं। इसलिए अपने मैनर्स हमेशा अच्छा रखें। नम्र रहे और प्लीज, सॉरी और थैंक यू जैसे शब्द अगर हमारी जिंदगी में शामिल नहीं है तो हमें खुद के बारे में सोचना होगा।
मोबाइल कंट्रोल
इन दिनों मोबाइल हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है। इसलिए इस पर किये जाने वाली एक्टिविटीज को भी नियंत्रित करें।

दूसरे सत्र में रेखी फाउंडेशन की हैप्पीनेस कोच डॉ. ऋतु पांडे शर्मा ने सजग और चैतन्य रहकर जीवन जीने के गुर और उसके फायदे बताए। उन्होंने कहा कि हमारा मस्तिष्क असीम संभावनाओं से भरा है। आप जो कुछ भी करते हैं वो सारे काम एक आदत बनकर और हमारे व्यवहार का पैटर्न भी तय करते हैं। उन्होंने रोचक कहानियों के माध्यम से बताया कि माइंडफुलनेस क्या है और कैसे हम नकारात्मक विचारों के आने के समय खुद को उनसे बचा सकते हैं। अपनी सोच में बदलाव लाकर हम व्यक्तित्व में बदलाव ला सकते हैं। जीवन है तो समस्या भी होगी और समस्या है तो समाधान भी होगा। अपने आप से पूछिए क्या जीवन की भागदौड़ में हम कोई भी कदम उठाने से पहले सोचते हैं, विचार करते हैं या ठहरते हैं? अगर नहीं तो हमें एक पॉज लेने की जरुरत है। किसी भी घटना या व्यक्ति या बात पर रिएक्ट करने के बजाय रिस्पॉन्स देने को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि हम सभी खुश रहना चाहते हैं लेकिन खुशी कोई मंजिल नहीं बल्कि एक यात्रा है उस यात्रा का ही दूसरा नाम माइंडफुलनेस है। हमारे भीतर हजारों विचार जन्म लेते हैं लेकिन उनमें से उपयोगी कितने हैं यह हम नहीं जानते।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अगर हम भीतर से शांत और संतुष्ट नहीं हैं तो जरूर हमारे जीवन जीने की शैली में कोई कमी है ऐसे में माइंडफुलनेस ही हमें बचा सकता है।  छोटे से छोटे काम को भी पूरी अवैयरनेस के साथ करना चाहिए। एक बार हमारी मस्तिष्क की तरंगे सकारात्मकता के लिए प्रशिक्षित हो गई तो वह वातावरण से भी अच्छी तरंग ही आकर्षित करेंगी। सजग हो कर जीने से मानस में शांति होगी और मानस शांत होगा तो वही शांति व्यवहार में दिखाई देगी। हमें बाहर के ट्रिगर से सावधान होकर उनसे प्रभावित नहीं होना है यह समझदारी ही हमको सुकून की तरफ ले जाएगी।

डा. ऋतु ने कहा कि हमें सबसे ज्यादा देखना है और सबसे ज्यादा सुनना है. हम गजेट्स के एडिक्शन के युग में हैं। देर रात जागकर हम अपने शरीर का रिदम बिगाड़ रहे हैं. शरीर आपकी आदतों के दुष्प्रभाव झेल रहा है एक दिन वह हाथ खड़े कर देगा आँखों की रौशनी और दिमाग की शक्ति कुंद हो जाएगी तब आप क्या करेंगे? हालात के समक्ष गिरना स्वाभाविक है पर फिर उठ खड़ा होना ज्यादा बड़ी बात है।ब्रेन को ट्रेनिंग देने का सबसे बढ़िया तरीका है आप एक बार अच्छा चुनकर उसे दोगे वह आपको हर जगह से अच्छा चुनकर लौटाएगा। माइंडफुलनेस को अपने जीवन का हिस्सा बनाने पर उन्होंने जोर दिया।

विरासत संरक्षण विषय पर विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि भारत में पर्यटन उद्योग पिछले दो  दशकों में बहुत तेज गति से बढ़ रहा है। भारत में देश के भीतर से भी और विदेशों से भी पर्यटक एक जगह से दूसरी जगह उमड़कर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज ऐतिहासिक महत्व के स्मारक और जगहें पर्यटन का मुख्य केंद्र बन गई हैं।
उन्होंने औपनिवेशिक काल के तीन विदेशी युवाओं की कहानियों से अपनी बात शुरू की जिन्होंने भारतीय पुरातत्व के सर्वेक्षण और संरक्षण की दिशा में काम किए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल में 19 साल का युवा मैकेनिकल इंजीनियर एलेक्जेंडर कनिंघम भारत में फौज में भर्ती होकर आया था। अपने एक मित्र जेम्स प्रिंसेफ से मित्रता के चलते उसकी रूचि पुरातत्व और इतिहास जैसे विषयों में बढ़ी। बाद में उसने प्रयास कर भारत में आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया(एएसआई) जैसे संगठन को स्थापित करवाया कनिंघम उसके पहले महानिदेशक बने और उन्होंने देशभर में पुरातत्व के महत्व के स्थलों का सर्वे किया। इसके बाद उन्होंने जाॅन मार्शल नामक 25 वर्षीय युवा के बारे में बताया जो एएसआई के निदेशक बने और देशभर में ऐतिहासिक स्थलों का सर्वे किया और उन पर महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत कीं। मार्शल के रिसर्च ने दुनिया के इतिहासकारों को भारत की विरासत को देखने का एक नया दृष्टिकोण दिया। श्री तिवारी ने जेम्स फग्युर्सन नामक युवा आयरिश व्यवसायी की चर्चा भी की जिसने उस दौर में भारतीय मंदिरों के स्थापत्य कला का गहन अध्ययन किया और बताया कि वे ज्यामिति और गणित के शानदार उदाहरण हैं।

उन्होंने इन तीनों युवाओं के जीवन और कार्यों की चर्चा करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि अपने विषयों का अध्ययन और उसमें काम करते हुए वे अन्य क्षेत्रों में भी अपनी रूचियों का विस्तार करें। इससे वे अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।   विदिशा जिले में उदयपुर नामक स्थान पर मिले शिलालेखों और वहां के मंदिर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां स्थानीय प्रयासों से 2018 में हेरिटेज विभाग शुरू हुई जिसके बाद लोगों ने इस ऐतिहासिक मंदिर और कस्बे को जानना शुरू किया।  उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास को जानना हमारा जन्मसिद्ध कर्तव्य है। हमारे देश की हजारों वर्ष की अद्भुत यात्रा है।  उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भारत के पुरातत्व के महत्व को समझने के लिए युवाओं को आगे आने की आवश्यकता है। कुलगुरू ने कहा कि अगली बार जब कभी हम किसी ऐतिहासिक स्थल पर पर्यटन के लिए जाएं और कोई कृति या शिलालेख आदि देखें तो जरूर सोचें कि इतिहास पत्थरों और शिलालेखों पर लिखी कहानियां है जिन्हें पढ़ने की आवश्यकता है।

इस आयोजन के संयोजक विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख प्रो. डा. पवित्र श्रीवास्तव ने उपस्थित अतिथयों का आभार किया। कार्यक्रम में सत्रों का संचालन डॉ जया सुरजानी ने किया। कार्यक्रम में कुलसचिव पी. शशिकला, विभागों के प्रमुख सहित प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।