किशोर दा आज भी करीब हैं: विनय उपाध्याय

एमसीयू में मशहूर कलाकार किशोर कुमार को किया याद

भोपाल 12 अक्टूबर 2026 : किशोर कुमार किसी एक विशाल, बड़े समंदर और हिमालय जैसे बहुत बड़े व्यक्तित्व के कलाकार हैं। गायकी, अदाकारी, लेखन और निर्देशन जैसे फिल्म निर्माण के सभी क्षेत्रों में उनका जबरदस्त दखल था। वे हरफनमौला कलाकार और बेहतरीन इंसान थे। अपनी जन्मभूमि खंडवा और वहां के अपने दोस्तों से उनका जुड़ाव बहुत ही गहरा था। सिनेमा की दुनिया में शिखर तक पहुंचने के बावजूद उन्होंने अपनी मृत्यु के बाद भी खंडवा में ही अपने अंतिम संस्कार करवाने की इच्छा जाहिर की थी। उनके निधन के बाद खंडवा में उनका स्मारक भी बना। वे अपने शहर और प्रशंसकों के आज भी करीब हैं।

ये बातें कहीं वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने। वे एमसीयू के सिनेमा तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित संवाद में किशोर दा को याद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार की जन्मभूमि खंडवा आवाजों का बसेरा है। इस नगर से अमर स्वाधीनता सेनानी और संपादक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, संत सिंगा जी से लेकर मशहूर गायक और कलाकार किशोर कुमार का जुड़ाव रहा है। ये सभी खंडवा की धरती से जुड़े रहे हैं। उन्होंने किशोर कुमार की बम्बई जाने की यात्रा को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा अपनी जमीन से जुड़े हुए रहे। फिल्म जगत में शिखर तक  पहुंचने के बावजूद उनकी स्मृति में खंडवा हमेशा बना रहा।  जब कभी भी उनका खंडवा आना होता था वे अपने निकटतम मित्रों के साथ वक्त बिताते थे। किशोर दा अक्सर अपने गीतों और फिल्म के किस्सों को अपने दोस्तों को सुनाते थे।

श्री उपाध्याय ने कहा खंडवा की यादों में भी किशोर कुमार हमेशा बने रहे हैं। वहां उनकी मां और पिता के नाम पर गौरीकुंज नाम से सभागृह और किशोर दा का स्मारक भी बना है। उनके स्मारक पर उनके प्रशंसक जाते हैं। यहां पर उनके गाए गीत और फिल्में चलती हैं। श्री विनय उपाध्याय ने किशोर कुमार के स्कूली दिनों से लेकर मुंबई जाने और गायकी की दुनिया में नाम कमाने, सफल फिल्म निर्माता निर्देशक बनने के अनेकों प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि गायकी में योडलिंग का प्रयोग करने वाले किशोर दा पहले और अनूठे गायक थे।  किशोर दा के चलती का नाम गाड़ी फिल्म का किस्सा भी उन्होंने सुनाया। उन्होंने कहा कि किशोर दा बेहद कल्पनाशील व्यक्ति थे।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि सिनेमाई स्मृतियों में किशोर कुमार को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिना किसी संगीत की औपचारिक शिक्षा के ही किशोर कुमार शानदार गायक बने। उनकी गायकी और अभिनय अमर हैं। उन्होंने किशोर दा की आंधी, दाग आदि फिल्मों के गीतों की भी चर्चा की। इस अवसर पर विषय की भूमिका और अतिथियों का आभार विभागाध्यक्ष डा. पवित्र श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग की डा. विशाखा राजुरकर ने किया।

 कार्यक्रम में विभागों के विद्यार्थी एवं प्राध्यापक उपस्थित थे।