एमसीयू में विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर बोलने की कला, शिल्प और विज्ञान की कार्यशाला आयोजित
आवाज़ की दुनिया के धुरंधर आए माखनपुरम में
रेडियो कर्मवीर की री लॉन्चिंग पर जुटे आवाज़ के सितारे
भोपाल 12 फरवरी 2026 : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में रेडियो कर्मवीर की री-लॉन्चिंग 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस पर की जा रही है इस अवसर की पूर्व संध्या पर विद्यार्थियों के लिए आवाज़ की दुनिया के जानेमाने नाम परिसर में आए और उन्होंने वर्कशॉप के द्वारा विद्यार्थियों को रेडियो के लिए बोलने और लिखने के गुर सिखाए। अख़बार पहल और विकल्प के पश्चात कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने रेडियो कर्मवीर की कायाकल्प का बीड़ा उठाया और विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान व अभ्यास के उद्देश्य से रेडियो कर्मवीर के लिए तैयार किया गया।
इसके तहत जनसंचार विभाग के तत्वावधान में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला मेें विविध भारती से गूंजने वाली मखमली आवाज के धनी श्री कमल शर्मा और बीबीसी की पत्रकार शैफाली चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया।
प्रथम सत्र में सुश्री शैफाली ने बताया कि रेडियो लेखन की कला, क्राफ्ट और साइंस जानना कितना जरुरी है। उन्होंने अत्यंत रोचक अंदाज़ में एक्टिविटी करवा कर और अपनी प्रस्तुति ‘खिड़की मेहंदी वाली’ के माध्यम से बताया कि रेडियो की दुनिया में आपका शो कितना सफल होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम यह जानें कि हमारा श्रोता कौन है।
विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यशाला के दूसरे सत्र में विविध भारती की जानी पहचानी आवाज़ श्री कमल शर्मा ने छाया गीत और गुरुदत साहब पर बने रेडियो फीचर के माध्यम से सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया।
प्रतिभागियों से उन्होंने कहा कि कहानी हर कहीं है, हर किसी की है बस हमें सुनाना आना चाहिए। आवाज़ अच्छी या बुरी नहीं होती हमारी प्रस्तुति सही या गलत होती है। आप कितनी तन्मयता से रस लेकर शब्दों के अर्थ को महसूस कर अपने श्रोता तक पहुंचाते हैं यह महत्वपूर्ण है।
शब्दों की भी लम्बाई, चौड़ाई और गोलाई होती है इसे समझ कर बोलने की कला विकसित कीजिए।
अपने प्रति निर्मम बनिए, अपने आलोचक खुद बनिए। माइक्रोफोन आपका पहला श्रोता है उससे बात कीजिए। वही आपका दोस्त है वही आपकी सहेली।
इस अवसर पर माननीय कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सहित रेडियो कर्मवीर के निदेशक डॉ. आशीष जोशी, प्रो. संजय द्विवेदी, प्रो. शिवकुमार विवेक उपस्थित थे। डॉ. लाल बहादुर ओझा ने सत्र संचालन किया और तकनीकी सहयोग डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने दिया।
विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला का पूरे मनोयोग से लाभ लिया और सवाल जवाब के साथ अपनी जिज्ञासा भी शांत की.





