समाज को देखने और समझने की दृष्टि देती है पत्रकारिता : श्री रजनीश अग्रवाल

                                        एमसीयू में चल रहे सत्रारंभ कार्यक्रम अभ्युदय 2026‘ का समापन

भोपाल 20 अगस्त 2026 : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन कार्यक्रम ‘अभ्युदय-2026’ में तीसरे दिन देशभर से आये पूर्व विद्यार्थियों ने नवागत विद्यार्थियों को संबोधित किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि मैंने एमसीयू में पत्रकारिता के अध्ययन के दौरान जो कुछ पढ़ा-सीखा, वह सब राजनीतिक क्षेत्र में मुझे काम आया। पत्रकारिता की पढ़ाई ने मुझे समाज को देखने और समझने की दृष्टि दी है। उन्होंने कहा कि मैं किसी संयोगवश या बिना विचार किए पत्रकारिता का अध्ययन करने नहीं आया था अपितु मैंने विचारपूर्वक पत्रकारिता की पढ़ाई चुनी। समाज में क्या घट रहा है, क्यों घट रहा है, इसको समझने की दृष्टि पत्रकारिता देती है। अपनी संस्कृति, परंपरा और समाज से जुड़ने का अवसर भी पत्रकारिता देती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सभी व्यवसायिक क्षेत्रों में नैतिकता और मूल्य हैं, इसलिए सब टिके हुए हैं। प्रत्येक क्षेत्र में कहीं न कहीं नैतिकता और मूल्य हैं। इस मौके पर राज्यसभा सांसद श्री रजनीश अग्रवाल द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया।

चर्चित बिजनेस पत्रकार मृत्युंजय झा ने कहा कि बिजनेस पत्रकारिता में अगर हम एक गलत डेटा बोल दें तो उसका सीधा असर मार्केट पर पड़ सकता है। एक गलत खबर बड़ा उलट-फेर कर सकती है। पत्रकारिता में एंकर और रिपोर्टर के अलावा भी बहुत सारी भूमिकाएं हैं। प्रथम बैच के विद्यार्थी एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पंत ने कहा कि पत्रकारिता में काम करने के लिए जुनूनी होना जरूरी है। अभी हमें भविष्य की चिंता करने की जगह अधिक से अधिक पढ़ना चाहिए। आपको प्रतिदिन कम से कम दो समाचार पत्र पढ़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि आप जो भी पढ़ें उसका दोगुना अभ्यास करें। समाचार लिखें, वीडियो बनाएं, ग्राफिक्स बनाना सीखें।

रक्षा पत्रकारिता कर रहे कृष्ण मोहन मिश्रा ने कहा कि मैंने अपनी रुचि से डिफेंस रिपोर्टिंग चुनी है। डिफेंस रिपोर्टिंग आगे भी रहने वाली है क्योंकि मनुष्य की फितरत है कि वह हमेशा से युद्ध करते आ रहा है। हम बचपन से युद्ध की कहानियां सुनते आ रहे हैं। यानी युद्ध की कहानियों में हमारी दिलचस्पी रहती है। डिजिटल पत्रकार अनिल पांडेय ने कहा कि मीडिया इंडस्ट्री में बहुत जॉब हैं लेकिन उनके लिए कुशल लोगों की जरूरत है। आज के समय में वीडियो शूट करने के लिए कैमरा की आवश्यकता नहीं है बल्कि आप मोबाइल फोन से भी अच्छे वीडियो शूट कर सकते हैं। हमें इस प्रकार से शूट करना चाहिए कि संपादन की आवश्यकता कम रहे।

विकास संवाद के निदेशक सचिन जैन ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने मुझे विकास संचार और विश्लेषण की क्षमता दी। उसके कारण मुझे विकास संचार क्षेत्र में काम करने की दिशा मिली। उन्होंने कहा कि संचार के कौशल का उपयोग हमें किसके लिए करना है, यह विचार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में सबसे महत्वपूर्ण कौशल है- ऑब्जर्वेशन। जितना अच्छा हमारा ऑब्जर्वेशन होगा, हम उतने अच्छे पत्रकार बनेंगे। इसी सत्र में पूर्व विद्यार्थी एन. हरि प्रकाश ने केन्या से ऑनलाइन जुड़कर नवागत विद्यार्थियों के साथ अपने करियर की यात्रा साझा की।

जनसंपर्क के क्षेत्र में कार्यरत आशीष चौहान ने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में काम करने से पहले आप सोचें कि आप क्या करना चाहते हैं। आप जो काम करना चाहते हैं, उसके लिए कौन-सी स्किल्स आवश्यक हैं, उनको चिन्हित करें और सीखें। डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री एक्सपर्ट के रूप में काम कर रही आयुषी श्रीवास्तव ने ग्राहकों को रोकने और अपने व्यवसाय को लोगों तक पहुंचाने के तरीकों को विद्यार्थियों से साझा किया। किसी भी व्यवसाय के लिए सबसे जरूरी पहलू पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि समय पर पैसे का होना किसी भी व्यवसाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

एडवरटाइजिंग फील्ड में अपना योगदान दे रहे पूर्व छात्र अमित कौसरवाल ने संवाद के लिए  लोगों को समझना सबसे जरूरी गुण बताया। संचार, ब्रांड प्रमोशन और विज्ञापन के क्षेत्र में वही व्यक्ति सर्वाइव कर सकता है जो इस बारे में अपडेट रहता है कि लोग क्या सोच रहे हैं, वे क्या कर रहे और क्या देख रहे हैं। आरकॉम की मैनेजिंग डायरेक्टर कविता कौसरवाल ने बताया कि अगर आपको कुछ नया करना है तो लोगों से मिलना और बात करना पड़ेगा। वहीं से नई कहानियां मिलेंगी। उन्होंने कहा कि हमें ईमानदार होना पड़ेगा। हम जो नहीं जानते उसे ईमानदारी से स्वीकार करेंगे तभी उसे सीख सकते हैं। राजनीतिक कैंपेनिंग कर रहे डॉ. सुलभ सिंह ने किरदार, कहानी और किस्सों के माध्यम से अपनी यात्रा विद्यार्थियों से साझा किया। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पूर्व विद्यार्थी श्री देवरूप आर्या ने कहा कि विश्वविद्यालय ने मुझे केवल एक प्रोफेशन नहीं दिया, अपितु एक पर्सनालिटी दी है। इसके साथ ही आईटी के क्षेत्र में कार्यरत श्री अभिषेक बेहरा ने भी अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ डीडी न्यूज संवाददाता आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि हमारे शिक्षकों ने हमें अनुशासन सिखाया, जिसका लाभ हमें अपने कार्यक्षेत्र में मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कंटेंट और भाषा पर अपनी पकड़ बनाएं, यह आपको आत्मविश्वास देगा। श्री कुमार सौरभ ने कहा कि हम कठिन लक्ष्य लेकर आगे बढ़े। बड़े सपने देखें। आप जो चाह लेते हो, वह हो जाता है। उन्होंने कहा कि कौन पढ़ रहा है, कौन लिख रहा है, यह भूल जाओ केवल अपने लिए लिखो। खूब लिखो, यह आपको निखारेगा।

समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता अनिश्चिताओं का क्षेत्र है, जहां संघर्ष है। ‘अभ्युदय’ में आये पूर्व विद्यार्थियों की सफलता की कहानियां बताती हैं कि वे सब संघर्ष से एक मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि अभ्युदय के इन तीन दिनों के कार्यक्रम में जिस ऊर्जा की अनुभूति आपने की है, उसे अपने पाठ्यक्रम के दौरान बनाए रखें। अंत में, आभार प्रदर्शन कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने किया।